Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 9.24 / 35

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)9.24

9.24
येऽप्यन्यदेवताभक्ता यजन्ते श्रद्धयान्विताः । तेऽपि मामेव कौन्तेय यजन्त्यविधिपूर्वकम् ॥ ९-२४ ॥
ye'pyanyadevatābhaktā yajante śraddhayānvitāḥ | te'pi māmeva kaunteya yajantyavidhipūrvakam || 9-24 ||
— जो अन्य देवताओं के भक्त भी ; — श्रद्धा से युक्त होकर पूजते हैं ; — वे भी मुझे ही, हे कुन्तीपुत्र ; — पूजते हैं, यद्यपि अविधिपूर्वक

हे कुन्तीपुत्र, जो श्रद्धा से युक्त होकर अन्य देवताओं के भक्त होकर उन्हें पूजते हैं, वे भी मुझे ही पूजते हैं, यद्यपि अविधिपूर्वक।