कविं पुराणमनुशासितार मणोरणीयांसमनुस्मरेद्यः ।
सर्वस्य धातारमचिन्त्यरूप मादित्यवर्णं तमसः परस्तात् ॥
८-९ ॥
kaviṃ purāṇamanuśāsitāra maṇoraṇīyāṃsamanusmaredyaḥ |
sarvasya dhātāramacintyarūpa mādityavarṇaṃ tamasaḥ parastāt ||
8-9 ||
जो उस कवि (सर्वज्ञ), पुरातन, अनुशासक, अणु से भी सूक्ष्म, सबके धाता, अचिन्त्य-रूप, सूर्य के समान वर्ण वाले, अन्धकार से परे (पुरुष) का स्मरण करे —