Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 8.9 / 28

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)8.9

8.9
कविं पुराणमनुशासितार मणोरणीयांसमनुस्मरेद्यः । सर्वस्य धातारमचिन्त्यरूप मादित्यवर्णं तमसः परस्तात् ॥ ८-९ ॥
kaviṃ purāṇamanuśāsitāra maṇoraṇīyāṃsamanusmaredyaḥ | sarvasya dhātāramacintyarūpa mādityavarṇaṃ tamasaḥ parastāt || 8-9 ||
— कवि (सर्वज्ञ), पुरातन, अनुशासक को ; — अणु से सूक्ष्म को जो स्मरण करे ; — सबके धाता, अचिन्त्यरूप को ; — सूर्यवर्ण, अन्धकार से परे को

जो उस कवि (सर्वज्ञ), पुरातन, अनुशासक, अणु से भी सूक्ष्म, सबके धाता, अचिन्त्य-रूप, सूर्य के समान वर्ण वाले, अन्धकार से परे (पुरुष) का स्मरण करे —