Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 8.17 / 28

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)8.17

8.17
सहस्रयुगपर्यन्तमहर्ये ब्रह्मणो विदुः । रात्रिं युगसहस्रान्तां तेऽहोरात्रविदो जनाः ॥ ८-१७ ॥
sahasrayugaparyantamaharye brahmaṇo viduḥ | rātriṃ yugasahasrāntāṃ te'horātravido janāḥ || 8-17 ||
— सहस्र युगों तक का ; — ब्रह्मा के दिन को जो जानते हैं ; — सहस्र युगों के अन्त तक रात्रि को ; — वे अहोरात्र के ज्ञाता लोग

जो ब्रह्मा के दिन को सहस्र युगों तक का जानते हैं और रात्रि को सहस्र युगों के अन्त तक की, वे ही अहोरात्र (दिन-रात) के ज्ञाता लोग हैं।