Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 7.3 / 30

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)7.3

7.3
मनुष्याणां सहस्रेषु कश्चिद्यतति सिद्धये । यततामपि सिद्धानां कश्चिन्मां वेत्ति तत्त्वतः ॥ ७-३ ॥
manuṣyāṇāṃ sahasreṣu kaścidyatati siddhaye | yatatāmapi siddhānāṃ kaścinmāṃ vetti tattvataḥ || 7-3 ||
— हजारों मनुष्यों में ; — कोई सिद्धि के लिए यत्न करता है ; — यत्न करके सिद्ध हुओं में भी ; — कोई मुझे तत्त्व से जानता है

हजारों मनुष्यों में कोई एक सिद्धि के लिए यत्न करता है; और यत्न करके सिद्ध हुए लोगों में भी कोई एक मुझे तत्त्व से जानता है।