Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 7.2 / 30

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)7.2

7.2
ज्ञानं तेऽहं सविज्ञानमिदं वक्ष्याम्यशेषतः । यज्ज्ञात्वा न पूनः किंचिज्ज्ञातव्यमवशिष्यते ॥ ७-२ ॥
jñānaṃ te'haṃ savijñānamidaṃ vakṣyāmyaśeṣataḥ | yajjñātvā na pūnaḥ kiṃcijjñātavyamavaśiṣyate || 7-2 ||
— यह ज्ञान विज्ञान-सहित तुझे मैं ; — पूर्णतः कहूँगा ; — जिसे जानकर फिर कुछ ; — जानने योग्य शेष नहीं रहता

मैं तुझे इस ज्ञान को विज्ञान के सहित पूर्णतः कहूँगा, जिसे जानकर इस लोक में फिर कुछ भी जानने योग्य शेष नहीं रहता।