कामैस्तैस्तैर्हृतज्ञानाः प्रपद्यन्तेऽन्यदेवताः ।
तं तं नियममास्थाय प्रकृत्या नियताः स्वया ॥
७-२० ॥
kāmaistaistairhṛtajñānāḥ prapadyante'nyadevatāḥ |
taṃ taṃ niyamamāsthāya prakṛtyā niyatāḥ svayā ||
7-20 ||
उन-उन कामनाओं से जिनका ज्ञान हर लिया गया है, वे अपनी प्रकृति से नियन्त्रित होकर, उस-उस नियम का आश्रय लेकर, अन्य देवताओं की शरण में जाते हैं।