Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 7.20 / 30

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)7.20

7.20
कामैस्तैस्तैर्हृतज्ञानाः प्रपद्यन्तेऽन्यदेवताः । तं तं नियममास्थाय प्रकृत्या नियताः स्वया ॥ ७-२० ॥
kāmaistaistairhṛtajñānāḥ prapadyante'nyadevatāḥ | taṃ taṃ niyamamāsthāya prakṛtyā niyatāḥ svayā || 7-20 ||
— उन-उन कामनाओं से अपहृत ज्ञान वाले ; — अन्य देवताओं की शरण में जाते हैं ; — उस-उस नियम का आश्रय लेकर ; — अपनी प्रकृति से नियन्त्रित

उन-उन कामनाओं से जिनका ज्ञान हर लिया गया है, वे अपनी प्रकृति से नियन्त्रित होकर, उस-उस नियम का आश्रय लेकर, अन्य देवताओं की शरण में जाते हैं।