Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 6.49 / 49

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)6.49

6.49
योगिनामपि सर्वेषां मद्गतेनान्तरात्मना । श्रद्धावान् भजते यो मां स मे युक्ततमो मतः ॥ ६-४९ ॥
yogināmapi sarveṣāṃ madgatenāntarātmanā | śraddhāvān bhajate yo māṃ sa me yuktatamo mataḥ || 6-49 ||
— और समस्त योगियों में भी ; — मुझमें लीन अन्तरात्मा से ; — जो श्रद्धावान् मुझे भजता है ; — वह मेरे मत में सबसे अधिक युक्त

और समस्त योगियों में भी जो मुझमें लीन अन्तरात्मा से श्रद्धापूर्वक मुझे भजता है, वह मेरे मत में सबसे अधिक युक्त (योगी) है।