Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 6.42 / 49

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)6.42

6.42
पार्थ नैवेह नामुत्र विनाशस्तस्य विद्यते । न हि कल्याणकृत् कश्चिद् दुर्गतिं जातु गच्छति ॥ ६-४२ ॥
pārtha naiveha nāmutra vināśastasya vidyate | na hi kalyāṇakṛt kaścid durgatiṃ jātu gacchati || 6-42 ||
— हे पार्थ, न इस लोक में न परलोक में ; — उसका विनाश होता है ; — क्योंकि कोई कल्याण करने वाला ; — कभी दुर्गति को प्राप्त नहीं होता

हे पार्थ, उसका न इस लोक में और न परलोक में विनाश होता है; क्योंकि कोई भी शुभ कर्म करने वाला कभी दुर्गति को प्राप्त नहीं होता।