एतन्मे संशयं कृष्ण च्छेत्तुमर्हस्यशेषतः ।
त्वदन्यः संशयस्यास्य छेत्ता न ह्युपपद्यते ॥
६-४१ ॥
etanme saṃśayaṃ kṛṣṇa cchettumarhasyaśeṣataḥ |
tvadanyaḥ saṃśayasyāsya chettā na hyupapadyate ||
6-41 ||
हे कृष्ण, मेरे इस संशय को आप पूर्णतः छेदने में समर्थ हैं; क्योंकि आपके अतिरिक्त इस संशय का छेदन करने वाला कोई और नहीं मिलता।