Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 6.41 / 49

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)6.41

6.41
एतन्मे संशयं कृष्ण च्छेत्तुमर्हस्यशेषतः । त्वदन्यः संशयस्यास्य छेत्ता न ह्युपपद्यते ॥ ६-४१ ॥
etanme saṃśayaṃ kṛṣṇa cchettumarhasyaśeṣataḥ | tvadanyaḥ saṃśayasyāsya chettā na hyupapadyate || 6-41 ||
— मेरे इस संशय को, हे कृष्ण ; — आप पूर्णतः छेदने में समर्थ ; — आपके अतिरिक्त इस संशय का ; — छेदन करने वाला कोई नहीं मिलता

हे कृष्ण, मेरे इस संशय को आप पूर्णतः छेदने में समर्थ हैं; क्योंकि आपके अतिरिक्त इस संशय का छेदन करने वाला कोई और नहीं मिलता।