भोक्तारं यज्ञतपसां सर्वलोकमहेश्वरम् ।
सुहृदं सर्वभूतानां ज्ञात्वा मां शान्तिमृच्छति ॥
५-२९ ॥
bhoktāraṃ yajñatapasāṃ sarvalokamaheśvaram |
suhṛdaṃ sarvabhūtānāṃ jñātvā māṃ śāntimṛcchati ||
5-29 ||
मुझे यज्ञों और तपों का भोक्ता, समस्त लोकों का महान् ईश्वर, और समस्त भूतों का सुहृद् जानकर मनुष्य शान्ति को प्राप्त करता है।