Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 4.5 / 42

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)4.5

4.5
बहूनि मे व्यतीतानि जन्मानि तव चार्जुन । तान्यहं वेद सर्वाणि न त्वं वेत्थ परन्तप ॥ ४-५ ॥
bahūni me vyatītāni janmāni tava cārjuna | tānyahaṃ veda sarvāṇi na tvaṃ vettha parantapa || 4-5 ||
— मेरे बहुत-से बीत चुके ; — जन्म, और तेरे भी, हे अर्जुन ; — उन सबको मैं जानता हूँ ; — तू नहीं जानता, हे परन्तप

हे अर्जुन, मेरे बहुत-से जन्म बीत चुके हैं और तेरे भी; उन सबको मैं जानता हूँ, किन्तु हे परन्तप, तू नहीं जानता।