Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 3.46 / 48

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)3.46

3.46
तस्मात्त्वमिन्द्रियाण्यादौ नियम्य भरतर्षभ । पाप्मानं प्रजहीह्येनं ज्ञानविज्ञाननाशनम् ॥ ३-४६ ॥
tasmāttvamindriyāṇyādau niyamya bharatarṣabha | pāpmānaṃ prajahīhyenaṃ jñānavijñānanāśanam || 3-46 ||
— अतः तू पहले इन्द्रियों को ; — संयत करके, हे भरतर्षभ ; — इस पापी (काम) को मार डाल ; — ज्ञान और विज्ञान का नाश करने वाले को

अतः हे भरतर्षभ, तुम पहले इन्द्रियों को संयत करके इस ज्ञान और विज्ञान का नाश करने वाले पापी (काम) को मार डालो।