Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 3.31 / 48

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)3.31

3.31
ये मे मतमिदं नित्यमनुतिष्ठन्ति मानवाः । श्रद्धावन्तोऽनसूयन्तो मुच्यन्ते सर्वकर्मभिः ॥ ३-३१ ॥
ye me matamidaṃ nityamanutiṣṭhanti mānavāḥ | śraddhāvanto'nasūyanto mucyante sarvakarmabhiḥ || 3-31 ||
— जो मेरे इस मत का नित्य ; — अनुसरण करते हैं, ऐसे मनुष्य ; — श्रद्धावान्, दोषदृष्टि से रहित ; — समस्त कर्मों से मुक्त हो जाते हैं

जो मनुष्य श्रद्धावान् और दोषदृष्टि से रहित होकर मेरे इस मत का नित्य अनुसरण करते हैं, वे समस्त कर्मों से मुक्त हो जाते हैं।