मयि सर्वाणि कर्माणि संन्यस्याध्यात्मचेतसा ।
निराशीर्निर्ममो भूत्वा युध्यस्व विगतज्वरः ॥
३-३० ॥
mayi sarvāṇi karmāṇi saṃnyasyādhyātmacetasā |
nirāśīrnirmamo bhūtvā yudhyasva vigatajvaraḥ ||
3-30 ||
समस्त कर्मों को मुझमें संन्यस्त करके, अध्यात्म-चित्त से, आशारहित और ममतारहित होकर, सन्ताप से मुक्त होकर युद्ध करो।