Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 3.30 / 48

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)3.30

3.30
मयि सर्वाणि कर्माणि संन्यस्याध्यात्मचेतसा । निराशीर्निर्ममो भूत्वा युध्यस्व विगतज्वरः ॥ ३-३० ॥
mayi sarvāṇi karmāṇi saṃnyasyādhyātmacetasā | nirāśīrnirmamo bhūtvā yudhyasva vigatajvaraḥ || 3-30 ||
— मुझमें समस्त कर्मों को ; — अध्यात्म-चित्त से संन्यस्त करके ; — आशारहित और ममतारहित होकर ; — सन्ताप से मुक्त होकर युद्ध कर

समस्त कर्मों को मुझमें संन्यस्त करके, अध्यात्म-चित्त से, आशारहित और ममतारहित होकर, सन्ताप से मुक्त होकर युद्ध करो।