Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 3.27 / 48

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)3.27

3.27
प्रकृतेः क्रियमाणानि गुणैः कर्माणि भागशः । अहङ्कारविमूढात्मा कर्ताहमिति मन्यते ॥ ३-२७ ॥
prakṛteḥ kriyamāṇāni guṇaiḥ karmāṇi bhāgaśaḥ | ahaṅkāravimūḍhātmā kartāhamiti manyate || 3-27 ||
— प्रकृति के द्वारा किए जाते ; — गुणों के द्वारा कर्म भागशः ; — अहंकार से मोहित आत्मा ; — 'मैं कर्ता हूँ' ऐसा मानता है

समस्त कर्म प्रकृति के गुणों के द्वारा भागशः (विभाग के अनुसार) किए जाते हैं; किन्तु अहंकार से मोहित चित्त वाला आत्मा 'मैं कर्ता हूँ' ऐसा मानता है।