Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 3.26 / 48

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)3.26

3.26
न बुद्धिभेदं जनयेदज्ञानां कर्मसङ्गिनाम् । जोषयेत् सर्वकर्माणि विद्वान्युक्तः समाचरन् ॥ ३-२६ ॥
na buddhibhedaṃ janayedajñānāṃ karmasaṅginām | joṣayet sarvakarmāṇi vidvānyuktaḥ samācaran || 3-26 ||
— बुद्धि में भेद उत्पन्न न करे ; — कर्म में आसक्त अज्ञानियों की ; — समस्त कर्मों में प्रेरित करे ; — विद्वान् स्वयं युक्त होकर आचरण करता हुआ

कर्म में आसक्त अज्ञानियों की बुद्धि में भेद उत्पन्न न करे; स्वयं युक्त होकर कर्म करता हुआ विद्वान् उन्हें समस्त कर्मों में प्रेरित करे।