Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 3.1 / 48

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)3.1

3.1
ज्यायसी चेत्कर्मणस्ते मता बुद्धिर्जनार्दन । तत्किं कर्मणि घोरे मां नियोजयसि केशव ! ॥ ३-१ ॥
jyāyasī cetkarmaṇaste matā buddhirjanārdana | tatkiṃ karmaṇi ghore māṃ niyojayasi keśava ! || 3-1 ||
— यदि आप कर्म की अपेक्षा बुद्धि (ज्ञान) को श्रेष्ठ मानते हैं ; — हे जनार्दन ; — तो फिर मुझे इस घोर कर्म में क्यों लगाते हैं ; — हे केशव

हे जनार्दन, यदि आप कर्म की अपेक्षा बुद्धि (ज्ञान) को श्रेष्ठ मानते हैं, तो हे केशव, फिर मुझे इस घोर कर्म में क्यों लगाते हैं?