ज्यायसी चेत्कर्मणस्ते मता बुद्धिर्जनार्दन ।
तत्किं कर्मणि घोरे मां नियोजयसि केशव ! ॥
३-१ ॥
jyāyasī cetkarmaṇaste matā buddhirjanārdana |
tatkiṃ karmaṇi ghore māṃ niyojayasi keśava ! ||
3-1 ||
हे जनार्दन, यदि आप कर्म की अपेक्षा बुद्धि (ज्ञान) को श्रेष्ठ मानते हैं, तो हे केशव, फिर मुझे इस घोर कर्म में क्यों लगाते हैं?