एषा ब्राह्मी स्थितिः पार्थ नैनां प्राप्य विमुह्यति ।
स्थित्वास्यामन्तकालेऽपि ब्रह्मनिर्वाणमृच्छति ॥
२-७४ ॥
eṣā brāhmī sthitiḥ pārtha naināṃ prāpya vimuhyati |
sthitvāsyāmantakāle'pi brahmanirvāṇamṛcchati ||
2-74 ||
हे पार्थ, यह ब्राह्मी स्थिति है; इसे प्राप्त करके मनुष्य मोहित नहीं होता; अन्तकाल में भी इसमें स्थित रहकर वह ब्रह्मनिर्वाण को प्राप्त करता है।