Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 2.73 / 74

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)2.73

2.73
विहाय कामान्यः सर्वान्पुमांश्चरति निस्पृहः । निर्ममो निरहङ्कारः स शान्तिमधिगच्छति ॥ २-७३ ॥
vihāya kāmānyaḥ sarvānpumāṃścarati nispṛhaḥ | nirmamo nirahaṅkāraḥ sa śāntimadhigacchati || 2-73 ||
— जो समस्त कामनाओं को त्यागकर ; — स्पृहारहित होकर पुरुष विचरता है ; — ममतारहित, अहंकाररहित ; — वह शान्ति को प्राप्त करता है

जो पुरुष समस्त कामनाओं को त्यागकर स्पृहारहित, ममतारहित और अहंकाररहित होकर विचरण करता है, वह शान्ति को प्राप्त करता है।