Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 3.2 / 48

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)3.2

3.2
व्यामिश्रेणेव वाक्येन बुद्धिं मोहयसीव मे । तदेकं वद निश्चित्य येन श्रेयोऽहमाप्नुयाम् ॥ ३-२ ॥
vyāmiśreṇeva vākyena buddhiṃ mohayasīva me | tadekaṃ vada niścitya yena śreyo'hamāpnuyām || 3-2 ||
— मिले-जुले से वचनों से ; — आप मानो मेरी बुद्धि को मोहित करते हैं ; — वह एक बात निश्चित करके कहिए ; — जिससे मैं श्रेय को प्राप्त करूँ

मानो मिले-जुले से वचनों से आप मेरी बुद्धि को मोहित कर रहे हैं; अतः वह एक बात निश्चित करके कहिए जिससे मैं श्रेय को प्राप्त कर सकूँ।