व्यामिश्रेणेव वाक्येन बुद्धिं मोहयसीव मे ।
तदेकं वद निश्चित्य येन श्रेयोऽहमाप्नुयाम् ॥
३-२ ॥
vyāmiśreṇeva vākyena buddhiṃ mohayasīva me |
tadekaṃ vada niścitya yena śreyo'hamāpnuyām ||
3-2 ||
मानो मिले-जुले से वचनों से आप मेरी बुद्धि को मोहित कर रहे हैं; अतः वह एक बात निश्चित करके कहिए जिससे मैं श्रेय को प्राप्त कर सकूँ।