Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 2.40 / 74

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)2.40

2.40
एषा तेऽभिहिता सांख्ये बुद्धिर्योगे त्विमां शृणु । बुद्ध्या युक्तो यया पार्थ कर्मबन्धं प्रहास्यसि ॥ २-४० ॥
eṣā te'bhihitā sāṃkhye buddhiryoge tvimāṃ śṛṇu | buddhyā yukto yayā pārtha karmabandhaṃ prahāsyasi || 2-40 ||
— यह तुझे सांख्य के अनुसार कही गई ; — अब इसे योग के विषय में सुन ; — जिस बुद्धि से युक्त होकर, हे पार्थ ; — तू कर्मबन्धन को त्याग देगा

यह बुद्धि (ज्ञान) तुम्हें सांख्य के अनुसार कही गई; अब इसे योग के विषय में सुनो — हे पार्थ, जिस बुद्धि से युक्त होकर तुम कर्मबन्धन को त्याग दोगे।