Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 2.39 / 74

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)2.39

2.39
सुखदुःखे समे कृत्वा लाभालाभौ जयाजयौ । ततो युद्धाय युज्यस्व नैवं पापमवाप्स्यसि ॥ २-३९ ॥
sukhaduḥkhe same kṛtvā lābhālābhau jayājayau | tato yuddhāya yujyasva naivaṃ pāpamavāpsyasi || 2-39 ||
— सुख-दुःख को समान मानकर ; — लाभ-हानि, जय-पराजय (को) ; — फिर युद्ध के लिए तैयार हो जा ; — इस प्रकार तुझे पाप नहीं लगेगा

सुख-दुःख, लाभ-हानि और जय-पराजय को समान मानकर युद्ध के लिए तैयार हो जाओ; इस प्रकार तुम्हें पाप नहीं लगेगा।