Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)2.39
सुखदुःखे समे कृत्वा लाभालाभौ जयाजयौ ।
ततो युद्धाय युज्यस्व नैवं पापमवाप्स्यसि ॥
२-३९ ॥
sukhaduḥkhe same kṛtvā lābhālābhau jayājayau |
tato yuddhāya yujyasva naivaṃ pāpamavāpsyasi ||
2-39 ||
— सुख-दुःख को समान मानकर ; — लाभ-हानि, जय-पराजय (को) ; — फिर युद्ध के लिए तैयार हो जा ; — इस प्रकार तुझे पाप नहीं लगेगा सुख-दुःख, लाभ-हानि और जय-पराजय को समान मानकर युद्ध के लिए तैयार हो जाओ; इस प्रकार तुम्हें पाप नहीं लगेगा।