Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 2.38 / 74

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)2.38

2.38
हतो वा प्राप्स्यसि स्वर्गं जित्वा वा भोक्ष्यसे महीम् । तस्मादुत्तिष्ठ कौन्तेय युद्धाय कृतनिश्चयः ॥ २-३८ ॥
hato vā prāpsyasi svargaṃ jitvā vā bhokṣyase mahīm | tasmāduttiṣṭha kaunteya yuddhāya kṛtaniścayaḥ || 2-38 ||
— मारे जाने पर तू स्वर्ग पाएगा ; — अथवा जीतकर पृथ्वी का भोग करेगा ; — अतः खड़ा हो, हे कुन्तीपुत्र ; — युद्ध के लिए निश्चय करके

मारे जाने पर तुम स्वर्ग पाओगे, अथवा जीतकर पृथ्वी का भोग करोगे; अतः हे कुन्तीपुत्र, युद्ध के लिए निश्चय करके खड़े हो जाओ।