Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 2.3 / 74

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)2.3

2.3
मा क्लैब्यं गच्छ कौन्तेन नैतत्त्वय्युपपद्यते । क्षुद्रं हृदयदौर्बल्यं त्यक्त्वोत्तिष्ठ परन्तप ॥ २-३ ॥
mā klaibyaṃ gaccha kauntena naitattvayyupapadyate | kṣudraṃ hṛdayadaurbalyaṃ tyaktvottiṣṭha parantapa || 2-3 ||
— नपुंसकता को प्राप्त मत हो ; — हे कुन्तीपुत्र ; — यह तुझमें शोभा नहीं देती ; — हृदय की तुच्छ दुर्बलता को ; — त्यागकर खड़ा हो ; — हे परन्तप

हे पार्थ, नपुंसकता को प्राप्त मत हो, यह तुम्हें शोभा नहीं देती; हे परन्तप, हृदय की इस तुच्छ दुर्बलता को त्यागकर खड़े हो जाओ।