Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 2.4 / 74

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)2.4

2.4
कथं भीष्ममहं सङ्ख्ये द्रोणं च मधुसूदन इषुभिः प्रतियोत्स्यामि पूजार्हावरिसूदन ॥ २-४ ॥
kathaṃ bhīṣmamahaṃ saṅkhye droṇaṃ ca madhusūdana iṣubhiḥ pratiyotsyāmi pūjārhāvarisūdana || 2-4 ||
— मैं युद्ध में भीष्म के विरुद्ध कैसे ; — और द्रोण के ; — हे मधुसूदन ; — बाणों से प्रहार करूँगा ; — दोनों पूजा के योग्य ; — हे अरिसूदन

हे मधुसूदन, हे अरिसूदन, मैं युद्ध में पूजा के योग्य भीष्म और द्रोण के विरुद्ध बाणों से कैसे प्रहार करूँगा?