Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 17.22 / 28

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)17.22

17.22
अदेशकाले यद्दानमपात्रेभ्यश्च दीयते । असत्कृतमवज्ञातं तत्तामसमुदाहृतम् ॥ १७-२२ ॥
adeśakāle yaddānamapātrebhyaśca dīyate | asatkṛtamavajñātaṃ tattāmasamudāhṛtam || 17-22 ||
— जो दान अनुचित देश-काल में ; — और अपात्रों को दिया जाता है ; — बिना सत्कार के, अवज्ञा के साथ ; — वह तामस कहा गया

जो दान अनुचित देश-काल में और अपात्रों को दिया जाता है, बिना सत्कार के और अवज्ञा के साथ — वह तामस कहा गया है।