Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 17.23 / 28

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)17.23

17.23
ॐ तत्सदिति निर्देशो ब्रह्मणस्त्रिविधः स्मृतः । ब्राह्मणास्तेन वेदाश्च यञाश्च विहिताः पुरा ॥ १७-२३ ॥
oṃ tatsaditi nirdeśo brahmaṇastrividhaḥ smṛtaḥ | brāhmaṇāstena vedāśca yañāśca vihitāḥ purā || 17-23 ||
— 'ॐ तत् सत्' ऐसा निर्देश ; — ब्रह्म का त्रिविध माना गया ; — इसी से ब्राह्मण और वेद ; — और यज्ञ पूर्वकाल में विहित हुए

'ॐ तत् सत्' — यह ब्रह्म का त्रिविध निर्देश माना गया है; इसी से पूर्वकाल में ब्राह्मण, वेद और यज्ञ विहित (नियत) किए गए।