Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 17.24 / 28

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)17.24

17.24
तस्मादोमित्युदाहृत्य यज्ञदानतपःक्रियाः । प्रवर्तन्ते विधानोक्ताः सततं ब्रह्मवादिनाम् ॥ १७-२४ ॥
tasmādomityudāhṛtya yajñadānatapaḥkriyāḥ | pravartante vidhānoktāḥ satataṃ brahmavādinām || 17-24 ||
— अतः 'ॐ' का उच्चारण करके ; — यज्ञ, दान, तप की क्रियाएँ ; — प्रवृत्त होती हैं, विधान में कही हुई ; — सदा, ब्रह्मवादियों की

अतः 'ॐ' का उच्चारण करके ब्रह्मवादियों की विधान में कही हुई यज्ञ, दान और तप की क्रियाएँ सदा प्रवृत्त होती हैं।