Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 17.1 / 28

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)17.1

17.1
ये शास्त्रविधिमुत्सृत्य वर्तन्ते श्रद्धायान्विताः । तेषां निष्ठा तु का कृष्णा सत्त्वमाहो रजस्तमः ॥ १७-१ ॥
ye śāstravidhimutsṛtya vartante śraddhāyānvitāḥ | teṣāṃ niṣṭhā tu kā kṛṣṇā sattvamāho rajastamaḥ || 17-1 ||
— जो शास्त्र-विधि को त्यागकर ; — श्रद्धा से युक्त होकर यजन करते हैं ; — उनकी निष्ठा क्या है, हे कृष्ण ; — सत्त्व, अथवा रजस्, अथवा तमस्

जो लोग शास्त्र-विधि को त्यागकर भी श्रद्धा से युक्त होकर यजन (पूजा) करते हैं — हे कृष्ण, उनकी निष्ठा क्या है? सत्त्व, अथवा रजस्, अथवा तमस्?