Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 16.19 / 24

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)16.19

16.19
तानहं द्विषतः क्रूरान्संसारेषु नराधमान् । क्षिपाम्यजस्रमशुभास्वासुरीष्वेव योनिषु ॥ १६-१९ ॥
tānahaṃ dviṣataḥ krūrānsaṃsāreṣu narādhamān | kṣipāmyajasramaśubhāsvāsurīṣveva yoniṣu || 16-19 ||
— उन द्वेष करने वाले क्रूरों को ; — संसारों में नराधमों को ; — मैं निरन्तर अशुभ में फेंकता हूँ ; — केवल आसुरी योनियों में

उन द्वेष करने वाले क्रूर नराधमों को मैं संसारों में निरन्तर अशुभ आसुरी योनियों में ही फेंकता रहता हूँ।