सर्वयोनिषु कौन्तेय मूर्तयः सम्भवन्ति याः ।
तासां ब्रह्म महद्योनिरहं बीजप्रदः पिता ॥
१४-४ ॥
sarvayoniṣu kaunteya mūrtayaḥ sambhavanti yāḥ |
tāsāṃ brahma mahadyonirahaṃ bījapradaḥ pitā ||
14-4 ||
हे कुन्तीपुत्र, समस्त योनियों में जो मूर्तियाँ (शरीर) उत्पन्न होती हैं, उनकी योनि महद्ब्रह्म है, और मैं बीज देने वाला पिता हूँ।