Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 14.3 / 27

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)14.3

14.3
मम योनिर्महद्ब्रह्म तस्मिन्गर्भं ददाम्यहम् । सम्भवः सर्वभूतानां ततो भवति भारत ॥ १४-३ ॥
mama yonirmahadbrahma tasmingarbhaṃ dadāmyaham | sambhavaḥ sarvabhūtānāṃ tato bhavati bhārata || 14-3 ||
— मेरी योनि महद्ब्रह्म ; — उसमें मैं गर्भ (बीज) रखता हूँ ; — समस्त भूतों की उत्पत्ति ; — उससे होती है, हे भारत

हे भारत, महद्ब्रह्म मेरी योनि है; उसमें मैं गर्भ (बीज) स्थापित करता हूँ; उससे समस्त भूतों की उत्पत्ति होती है।