तेषामहं समुद्धर्ता मृत्युसंसारसागरात् ।
भवामि न चिरात्पार्थ मय्यावेशितचेतसाम् ॥
१२-७ ॥
teṣāmahaṃ samuddhartā mṛtyusaṃsārasāgarāt |
bhavāmi na cirātpārtha mayyāveśitacetasām ||
12-7 ||
हे पार्थ, मुझमें आविष्ट चित्त वाले उन (भक्तों) का मैं शीघ्र ही मृत्यु-संसार रूपी सागर से उद्धार करने वाला बन जाता हूँ।