Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 12.8 / 20

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)12.8

12.8
मय्येव मन आधत्स्व मयि बुद्धिं निवेशय । निवत्स्यसि त्वं मय्येव योगमुत्तममास्थिः ॥ १२-८ ॥
mayyeva mana ādhatsva mayi buddhiṃ niveśaya | nivatsyasi tvaṃ mayyeva yogamuttamamāsthiḥ || 12-8 ||
— मुझमें ही मन को स्थापित कर ; — मुझमें बुद्धि को प्रविष्ट कर ; — तू मुझमें ही निवास करेगा ; — उत्तम योग में स्थित होकर

मुझमें ही मन को स्थापित कर, मुझमें ही बुद्धि को प्रविष्ट कर; इसके पश्चात् उत्तम योग में स्थित होकर तू मुझमें ही निवास करेगा।