Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)· 11.36 / 60

Bhagavad Gītā (Kashmirian recension)11.36

11.36
एतच्छ्रुत्वा वचनं केशवस्य कृताञ्जलिर्वेपमानः किरीटी । नमस्कृत्वा भूय एवाह कृष्णं सगद्गदं भीतभीतः प्रणम्य ॥ ११-३६ ॥
etacchrutvā vacanaṃ keśavasya kṛtāñjalirvepamānaḥ kirīṭī | namaskṛtvā bhūya evāha kṛṣṇaṃ sagadgadaṃ bhītabhītaḥ praṇamya || 11-36 ||
— केशव का यह वचन सुनकर ; — हाथ जोड़कर, काँपते हुए मुकुटधारी ; — नमस्कार करके, फिर कृष्ण से बोला ; — गद्गद स्वर से, अत्यन्त भयभीत होकर, प्रणाम करके

केशव के इस वचन को सुनकर मुकुटधारी (अर्जुन) ने हाथ जोड़कर, काँपते हुए, नमस्कार करके, अत्यन्त भयभीत होकर प्रणाम करके, गद्गद स्वर से कृष्ण से फिर कहा —