The Great Liberation Tantra· 3.17 / 153

The Great Liberation Tantra3.17

3.17
चतुर्वर्गं करे कृत्वा परत्रेह च मोदते ॥१७॥
caturvargaṃ kare kṛtvā paratreha ca modate ||17||
— चारों पुरुषार्थों को ; — हाथ में ; — करके ; — परलोक में ; — इस लोक में ; — और ; — आनन्दित होता है

चारों पुरुषार्थों को हाथ में करके वह इस लोक और परलोक — दोनों में आनन्दित होता है।