चतुर्वर्गं करे कृत्वा परत्रेह च मोदते ॥१७॥
caturvargaṃ kare kṛtvā paratreha ca modate ||17||
चारों पुरुषार्थों को हाथ में करके वह इस लोक और परलोक — दोनों में आनन्दित होता है।
चारों पुरुषार्थों को हाथ में करके वह इस लोक और परलोक — दोनों में आनन्दित होता है।