The Great Liberation Tantra3.18
स धन्यः स कृतार्थश्च स कृती स च धार्मिकः ।
स स्नातः सर्वतीर्थेषु सर्वयज्ञेषु दीक्षितः ॥१८॥
sa dhanyaḥ sa kṛtārthaśca sa kṛtī sa ca dhārmikaḥ |
sa snātaḥ sarvatīrtheṣu sarvayajñeṣu dīkṣitaḥ ||18||
— वह ; — धन्य ; — वह ; — और कृतार्थ ; — वह ; — कृती ; — वह ; — और ; — धार्मिक ; — वह ; — स्नात ; — समस्त तीर्थों में ; — समस्त यज्ञों में ; — दीक्षित वह धन्य है, कृतार्थ है, कृती और धार्मिक है; वह समस्त तीर्थों में स्नात और समस्त यज्ञों में दीक्षित (हो चुका) है;