The Great Liberation Tantra· 3.19 / 153

The Great Liberation Tantra3.19

3.19
सर्वशास्त्रेषु निष्णातः सर्वलोकप्रतिष्ठितः । यस्य कर्णपथोपान्तप्राप्तो मन्त्रमहामणिः ॥१९॥
sarvaśāstreṣu niṣṇātaḥ sarvalokapratiṣṭhitaḥ | yasya karṇapathopāntaprāpto mantramahāmaṇiḥ ||19||
— समस्त शास्त्रों में ; — निष्णात ; — समस्त लोक में प्रतिष्ठित ; — जिसके ; — कान के निकट पहुँचा ; — मन्त्र-रूपी महामणि

वह समस्त शास्त्रों में निष्णात और समस्त लोक में प्रतिष्ठित है — वह, जिसके कान के निकट यह मन्त्र-रूपी महामणि पहुँच गई है।