The Great Liberation Tantra· 3.16 / 153

The Great Liberation Tantra3.16

3.16
बहुजन्मार्जितैः पुण्यैः सद्गुरुर्यदि लभ्यते । तदा तद्वक्त्रतो ज्ञात्वा जन्मसाफल्यमाप्नुयात् ॥१६॥
bahujanmārjitaiḥ puṇyaiḥ sadgururyadi labhyate | tadā tadvaktrato jñātvā janmasāphalyamāpnuyāt ||16||
— अनेक जन्मों में अर्जित ; — पुण्यों से ; — सद्गुरु ; — यदि ; — प्राप्त हो ; — तब ; — उसके मुख से ; — जानकर ; — जन्म की सफलता को ; — प्राप्त करे

यदि अनेक जन्मों में अर्जित पुण्यों से सद्गुरु प्राप्त हो जाए, तो उसके मुख से (इस मन्त्र को) जानकर मनुष्य जन्म की सफलता प्राप्त कर लेता है।