The Great Liberation Tantra2.1
इति देव्या वचः शृत्वा शङ्करो लोकशङ्करः ।
कथयामास तत्त्वेन महाकारुण्यवारिधिः ॥१॥
iti devyā vacaḥ śṛtvā śaṅkaro lokaśaṅkaraḥ |
kathayāmāsa tattvena mahākāruṇyavāridhiḥ ||1||
— इस प्रकार ; — देवी के ; — वचन को ; — सुनकर ; — शंकर ; — लोक का कल्याण करने वाले ; — कहा, उपदेश किया ; — यथार्थ रूप से ; — महाकरुणा के सागर इस प्रकार देवी के वचन सुनकर, लोक का कल्याण करने वाले, महाकरुणा के सागर शंकर ने यथार्थ रूप से (तत्त्व का) उपदेश किया।