The Great Liberation Tantra· 1.5 / 72

The Great Liberation Tantra1.5

1.5
सिद्धचारणगन्धर्वगाणपत्यगणैर्वृते । तत्र मौनधरं देवं चराचरजगद्गुरुम् ॥५॥
siddhacāraṇagandharvagāṇapatyagaṇairvṛte | tatra maunadharaṃ devaṃ carācarajagadgurum ||5||
— सिद्ध, चारण, गन्धर्व और गाणपत्य गणों से घिरे हुए ; — वहाँ ; — मौन धारण करने वाले को ; — देव को ; — चराचर जगत् के गुरु को

वहाँ, सिद्ध, चारण, गन्धर्व और गाणपत्य गणों से घिरे हुए, मौनधारी देव, चराचर जगत् के गुरु,