The Great Liberation Tantra· 1.4 / 72

The Great Liberation Tantra1.4

1.4
मत्तकोकिलसन्दोहसङ्घुष्टविपिनान्तरे । सर्वदा स्वगणैः सार्द्धमृतुराजनिषेविते ॥४॥
mattakokilasandohasaṅghuṣṭavipināntare | sarvadā svagaṇaiḥ sārddhamṛturājaniṣevite ||4||
— मत्त कोकिलों के समूहों से कूजते वन-प्रदेश वाला ; — सदा, सर्वदा ; — अपने गणों सहित ; — साथ, सहित ; — ऋतुराज (वसन्त) से सेवित

जिसका वन-प्रदेश मत्त कोकिलों के समूहों से कूज रहा था, और जो सदा अपने गणों सहित ऋतुराज (वसन्त) से सेवित था —