The Great Liberation Tantra· 1.37 / 72

The Great Liberation Tantra1.37

1.37
न वेदाः प्रभवस्तत्र स्मृतीनां स्मरणं कुतः । नानेतिहासयुक्तानां नानामार्गप्रदर्शिनाम् ॥३७॥
na vedāḥ prabhavastatra smṛtīnāṃ smaraṇaṃ kutaḥ | nānetihāsayuktānāṃ nānāmārgapradarśinām ||37||
— नहीं ; — वेद ; — प्रभावशाली ; — उसमें ; — स्मृतियों का ; — स्मरण ; — कहाँ से ; — नाना इतिहासों से युक्त (ग्रन्थों) का ; — नाना मार्गों को दिखाने वालों का

उसमें वेद प्रभावशाली नहीं रहते; फिर स्मृतियों का स्मरण कहाँ — जो नाना इतिहासों से युक्त और नाना मार्गों को दिखाने वाली हैं?