सा हि समस्तभावसन्दर्भमयी स्वतन्त्रसंवेदनमहिम्ना तथा नियतनिजनिजदेशकालभावराशिस्वभावा प्रत्येकं वस्तुस्वरूपनिष्पत्तिसमये तथाभूता तथाभूताया हि अन्यथाभावो यथा यथा अधिकीभवति तथा तथा कार्यस्यापि विजातीयत्वं तारतम्येन पुष्यति
Transliteration (IAST)
sā hi samastabhāvasandarbhamayī svatantrasaṃvedanamahimnā tathā niyatanijanijadeśakālabhāvarāśisvabhāvā pratyekaṃ vastusvarūpaniṣpattisamaye tathābhūtā tathābhūtāyā hi anyathābhāvo yathā yathā adhikībhavati tathā tathā kāryasyāpi vijātīyatvaṃ tāratamyena puṣyati
क्योंकि वह (सामग्री) समस्त भावों के सन्दर्भ से युक्त, स्वतन्त्र-संवेदन की महिमा से इस प्रकार नियत निज-निज देश-काल-भाव-राशि के स्वभाव वाली, प्रत्येक वस्तु के स्वरूप-निष्पत्ति के समय वैसी ही (होती है); क्योंकि वैसी (सामग्री) का अन्यथा-भाव जैसे-जैसे अधिक होता जाता है, वैसे-वैसे कार्य का विजातीयत्व भी तरतमता से बढ़ता है।