The Essence of the Tantra· 8.8 / 93

The Essence of the Tantra8.8

8.8

पारमार्थिके हि भित्तिस्थानीये स्थिते रूपे सर्वम् इदम् उल्लिख्यमानं घटते न अन्यथा अत एव सामग्र्या एव कारुणत्वं युक्तम्

Transliteration (IAST)

pāramārthike hi bhittisthānīye sthite rūpe sarvam idam ullikhyamānaṃ ghaṭate na anyathā ata eva sāmagryā eva kāruṇatvaṃ yuktam

— भित्ति-स्थानीय — दीवार के समान आधारभूत ; — रूप (के स्थित होने पर) ; — उल्लिख्यमान — अंकित होता हुआ ; — घटित होता है, संगत होता है ; — सामग्री का (कारण-समूह का) ; — कारणत्व — कारण होने की दशा

क्योंकि भित्ति-स्थानीय (दीवार के समान आधारभूत) पारमार्थिक रूप के स्थित होने पर ही यह समस्त उल्लिख्यमान (अंकित होता हुआ) घटित होता है, अन्यथा नहीं। इसी कारण सामग्री को भी कारणत्व देना युक्त है।