The Essence of the Tantra· 8.7 / 93

The Essence of the Tantra8.7

8.7

तत्रापि च परमेश्वरस्य कर्तृत्वानपाय इति अकल्पितो ऽपि असौ पारमार्थिकः स्थित एव

Transliteration (IAST)

tatrāpi ca parameśvarasya kartṛtvānapāya iti akalpito 'pi asau pāramārthikaḥ sthita eva

— परमेश्वर का ; — कर्तृत्व का अनपाय (निरन्तर उपस्थिति) ; — अकल्पित — अकृत्रिम ; — पारमार्थिक (सम्बन्ध) ; — स्थित रहता है

और वहाँ भी परमेश्वर के कर्तृत्व का अनपाय (निरन्तरता) होने से, अकल्पित होने पर भी यह पारमार्थिक (सम्बन्ध) स्थित ही रहता है।