The Essence of the Tantra· 8.83 / 93

The Essence of the Tantra8.83

8.83

शब्दविशेषाणां हि क्षोभात्मनां यद् एकम् अक्षोभात्मकं प्राग्भावि सामान्यम् अविशेषात्मकं तत् शब्दतन्मात्रम्

Transliteration (IAST)

śabdaviśeṣāṇāṃ hi kṣobhātmanāṃ yad ekam akṣobhātmakaṃ prāgbhāvi sāmānyam aviśeṣātmakaṃ tat śabdatanmātram

— शब्द-विशेषों का ; — क्षोभ-आत्मक (संक्षोभ-रूप) ; — अक्षोभ-आत्मक (संक्षोभ-रहित) ; — प्राग्भावी — पूर्व-विद्यमान ; — अविशेष-आत्मक सामान्य ; — शब्द-तन्मात्र (ध्वनि का सूक्ष्म भूत)

क्योंकि क्षोभ-आत्मक शब्द-विशेषों का जो एक अक्षोभ-आत्मक, प्राग्भावी (पूर्व-विद्यमान), अविशेष-आत्मक सामान्य है, वही शब्द-तन्मात्र है।