The Essence of the Tantra· 8.46 / 93

The Essence of the Tantra8.46

8.46

बुद्धेर् गुणसङ्कीर्णाकाराया विवेकेन ग्रहीतुम् असामर्थ्यात्

Transliteration (IAST)

buddher guṇasaṅkīrṇākārāyā vivekena grahītum asāmarthyāt

— बुद्धि की ; — गुणों से संकीर्ण आकार वाली ; — विवेक से ग्रहण करने में ; — असमर्थता के कारण

क्योंकि गुणों से संकीर्ण आकार वाली बुद्धि स्वयं विवेक से (कुछ) ग्रहण करने में असमर्थ है।