तद् एतद् वर्णचतुष्टयम् उभयच्छायाधारित्वात् नपुंसकम् ऋ ॠ ऌ ॡ इति
Transliteration (IAST)
tad etad varṇacatuṣṭayam ubhayacchāyādhāritvāt napuṃsakam ṛ ṝ ḷ ḹ iti
यह वर्ण-चतुष्टय — ऋ, ॠ, ऌ, ॡ — दोनों (प्रकाश और विश्रान्ति) की छाया को धारण करने के कारण नपुंसक (बन्ध्य) है।