करणतोपसर्जनकर्तृभावस्फुटत्वात् पञ्च शुद्धकर्तृभावात् पञ्च विगलितविभागतया विकासोन्मुखत्वे पञ्च सर्वावच्छेदशून्यं शिवतत्त्वं षट्त्रिंशम्
Transliteration (IAST)
karaṇatopasarjanakartṛbhāvasphuṭatvāt pañca śuddhakartṛbhāvāt pañca vigalitavibhāgatayā vikāsonmukhatve pañca sarvāvacchedaśūnyaṃ śivatattvaṃ ṣaṭtriṃśam
करणता-उपसर्जन (गौण) कर्तृ-भाव के स्फुट होने से पाँच; शुद्ध कर्तृ-भाव से पाँच; विगलित-विभाग रूप से विकास-उन्मुख होने पर पाँच; और समस्त अवच्छेद से शून्य शिव-तत्त्व छत्तीसवाँ।